क्या वाकई नासा का यान चन्द्रमा पर उतरा था? या फिर हम कही न कही भ्रमित है

20 जुलाई 1969 को नासा अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने चन्द्रमा पर कदम रखने वाले पहले व्यक्ति का खिताब अपने नाम किया। जो कि मानव जाति की क्षमता के आदर्श और प्रधान उदाहरणो में से एक है। हाल ही में मानव के चन्द्रमा पर पहले कदम की वर्षगांठ दुनिया भर के वैज्ञानिक समाज और विज्ञान प्रेमियों द्वारा काफी उल्लास के साथ मनाई गयी । लेकिन क्या वाकई में चन्द्रमा पर वाकई कोई व्यक्ति उतरा था ? असल मे ये सवाल मेरा नही बल्कि उस बड़े वर्ग , जिसमे वैज्ञानिक वर्ग भी शामिल है ,का है जो पूरा विश्वास करते है कि चन्द्रमा पर कभी मानव उतरा ही नही और इसके लिए उनके पास अपने तर्क भी है।अपोलो 11 मून लैंडिंग एक पल था जिसने दुनिया को बदल दिया।
नासा के अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग, बज़ एल्ड्रिन और माइकल कोलिन्स ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और मानव प्रयासों के मोर्चे को आगे बढ़ाने के लिए महान बलिदान का सामना किया।
वही एक बड़े वर्ग का आज भी मानना है कि “उद्देश्यों के एक बहुत सीमित सेट” के साथ क्राफ्ट को उभारना, नासा मिशन वास्तव में “एक टेस्ट रन” था यह देखने के लिए कि क्या मानव जाति चंद्रमा तक पहुंच सकती है।
लेकिन क्या वाकई 1968 का चन्द्र मिशन वाकई एक छल था।आइए इस पर Sir Charles Shults III द्वारा कॉस्ट टू कॉस्ट कार्यक्रम में कहि गयी बातों पर गौर करते है
मून लैंडिंग फुटेज का प्रसारण एक स्टूडियो में फिल्माया गया था–सर चार्ल्स शट्स III जोकि के कई दशकों के अनुभव के साथ एक सम्मानित एयरोस्पेस इंजीनियर है , ने कॉस्ट टू कॉस्ट कार्यक्रम में इस पर कहा ” हाँ बेशक ऐसी जालसाजी की जा सकती है, लेकिन जरा सोचिए इसे यथार्थवादी बनाना वाकई कितना मुश्किल रहा होगा।”
उन्होंने फिल्मों का उदाहरण देते हुए कहा:जरा एक मूवी देखने और साथ ही उसके प्रस्तुत करने के हर फ्रेम और तरीके को सोचिएअब जरा आप सोचिए क्या ऐसे किसी फ़र्ज़ी मिशन को एक मूवी की तरह सीधा(लाइव) प्रस्तुत किया जाना सम्भव है ।
वही इसके साथ ही नासा ने 8400 तस्वीरे जारी की गई, जिनका पूरी तरह नकली होना असंभव है।
The “fluttering flag” conspiracy–मिशन की फुटेज में दिखाई देने वाले झंडे के तेज गति- मूवमेंट वाला सवाल जो अक्सर इस मिशन पर शक करने वाले पूछते है का जवाब देते हुए सर चार्ल्स शट्स 3rd कहते है–” कि नासा के वैज्ञानिक इस बात से अच्छी तरह वाकिफ थे कि बिना किसी वातावरण के झंडे के फहराने का कोई तरीका नहीं था – यह आसानी से लटक जाएगा।””वैज्ञानिकों ने कपड़े को बाहर रखने के लिए झंडे के किनारे पर एक स्प्रिंगदार तार लगाया और क्योंकि वहाँ कोई हवा नहीं है, इसीलिए झंडा लगाए जाने के बाद भी झंडा आगे बढ़ता रहा। चूंकि वहां निर्वात था इसलिए ऐसा कुछ नही था जिससे स्प्रिंग की गतिविधि को धीमा किया जा सके।”

The Van Allen radiation belt conspiracy theory

कुछ संशयवादि तर्क देते है कि चंद्रमा पर जाने के लिए, उन्हें यात्रा के दोनों और आने-जाने में वान एलन विकिरण बेल्ट से गुजरना होता है।ऐसे में उन पर रेडिएशन का भीत गहरा घातक प्रभाव होना चाहिए था।सर शुट्स का इस पर कहना है कि यह तर्क भौतिकी की खराब समझ पर आधारित है।
उन्होंने कहा: “लोगों को भौतिकी के बारे में बहुत अधिक जानकारी नहीं है, और वे नहीं जानते कि आखिर रेडिएशन की इंटेंसिटी क्या है।अंतरिक्ष यात्रियों को वैन एलन बेल्ट से गुजरने में लगभग चार घंटे लगते हैं और इस समयांतराल में रेडिएशन मात्र छाती का एक्स-रे लेने से ज्यादा कुछ नही होता। जोकि कोई घातक रेडिएशन की श्रेणी में तो शायद ही किसी की नजर में हो।”

The Moon temperature conspiracy theory

कुछ मून लैंडिंग कॉन्सपिरेसी(साजिश) सिद्धांतकारों का मानना है कि चंद्रमा ब्लिस्टरिंग तापमान मानव जाति या उनके उपकरणों के जीवित रहने के लिए असंभव बना देगा।सर शूट्स तापमान की चरम सीमा को स्वीकार करते हैं, लेकिन साथ ही यह भी बताते हैं कि इससे कुछ सरल तकनीकों के द्वारा कैसे मुकाबला किया जा सकता है।उन्होंने कहा: “चंद्रमा की सतह चंद्र दिन के दौरान 200F से अधिक हो सकती है, जो कि बेहद गर्म है।चूंकि वहां कोई बादलों की छांव नही है इसलिए अंतरिक्ष यात्री सीधे सूर्य किरणों की चपेट में आ रहे थे।हालाँकि नासा के स्पेससूट इससे अछूते थे और उनमें एयर कंडीशनिंग परतें भी थीं।
वही अंतरिक्ष यात्रियों को खाना नहीं मिला, क्योंकि उनके पास जीवित रखने के लिए उचित उपकरण थे।उपकरण भी अच्छी तरह से अछूता था, और शुरुआती मिशनों के दौरान, आप देखेंगे कि कैमरों पर परि रक्षण कवच कुछ ज्यादा मोटा है, और उन्होंने इसे बहुत समय तक सीधे सूर्य के प्रकाश के संपर्क में भी नहीं रहने दिया।
तो हम सर शट्स की इन बातों से समझ सकते है कि नासा का चन्द्र मिशन कोई फिल्मी नही बल्कि एक असली घटना था। हालांकि उस समय की टेक्नोलॉजी का अंदाजा लगाते हुए लोग इस पर विश्वास नही करते,परन्तु सच यही है कि उन्होंने कर दिखाया था।वो चांद पर गए थे।

Neil Armstrong, Michael Collins, Buzz Aldrin सभी तीनो बहादुर अंतरिक्ष यात्रियों को नमन।

Updated: July 24, 2019 — 9:25 pm

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