विज्ञान का ऐतिहासिक दिन: पहली बार जारी हुई ब्लैकहोल की असली तस्वीर

यह बात शायद 2010 या 2011 की है जब मैंने टीवी पर पहली बार स्टीफेन हॉकिंग इंटरव्यू देखा। यह इंटरव्यू या यूं कहें वैज्ञानिक प्रोग्राम नेशनल जियोग्राफी चैनल पर दिखाया गया था, जोकि मुख्यतः टाइम ट्रेवल पर आधारित था और जिसके शायद दो ही एपिसोड थे।जिसमें से किसी एक एपिसोड के अंत मे स्टीफन हॉकिंग ने कहा था कि ब्लैक होल 20वी सदी में मानव इतिहास सबसे बड़ी खोज थीं। चूंकि हाकिंग,चंद्रशेखर, आइंस्टाइन जैसे महान वैज्ञानिकों ने अपना पूरा जीवन ब्लैक होल के नाम कर दिया। जहां दिन प्रतिदिन अलग खोज सामने आई।
वही ब्लैक होल को देखना आज भी सम्भव नही हो पाया था। हमारे पास कोई ऐसा चित्र नही था जिसे कहा जा सके कि ये ब्लैकहोल है,कारण ब्लैक होल का प्रकाश तक को अवशोषित कर लेना।क्योकि हम सभी जानते है कि एक ब्लैक होल से प्रकाश का निकलना भी असम्भव है।

तो अब तक बस इसके आकार प्रकार को लेकर बस कयास ही लगाए जाते रहे थे।लेकिन आज का दिन यानी 10 अप्रैल 2019 ,यानी हाकिंग की मृत्यु के एक साल बाद वैज्ञानिक जगत के लिए एक ऐतिहासिक दिन में शामिल हो गया है ,क्योकि आज पहली बार किसी ब्लैक होल की एक वास्तविक तस्वीर सामने आई है।
दुनियाभर के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए रहस्य बने ब्लैक होल की पहली तस्वीर यानी 10 अप्रैल 2019 बुधवार को जारी की गई। यह तस्वीरें भारतीय समयानुसार शाम को 6 बजे जारी की गईं।

इस खोज के लिए दुनिया के 6 देशों हवाई, एरिजोना, स्पेन, मेक्सिको, चिलि और दक्षिणी ध्रुव में Event Horizon Telescopes लगाये गये है।इसका निर्माण खासतौर पर ब्लैक होल की तस्वीर लेने के लिए ही किया गया है और इन्ही सबसे लिये डेटा के परिणामस्वरूप ब्लैकहोल की यह तसवीर सामने आई है।
वही तस्वीर जारी करEvent Horizon Telescope द्वारा ली गयी आकाशगंगा एम87 में स्थित 53.5 मिलियन प्रकाश-वर्ष दूर मौजूद इस विशालकाय ब्लैक होल की इस तस्वीर में गैस और प्लाजमा का नांरगी रंग का प्रकाश निकलता दिख रहा है,जिसके मध्य ब्लैक होल काले ब्लैकस्पोट के समान प्रतीत हो रहा है।

वैज्ञानिकों ने ब्रसल्ज, शंघाई, टोक्यो , वॉशिंगटन, सैंटियागो और ताइपे में एकसाथ प्रेस वार्ता की और जिस दौरान इस तस्वीर को जारी किया गया। गोथ यूनिवर्सिटी फ्रैंकफर्ट की लुसिआनो रेजोला ने कहा कि” बेहद साधारण भाषा में कहा जाए तो यह ऐसा गड्ढा है, जिसे भरा नहीं जा सकता है।

क्या है ब्लैक होल–

विज्ञान से प्रेम करने वाला शायद ही कोई हो जो ब्लैकहोल के बारे में नही जानता।ब्लैक होल यानी कृष्ण विवर अर्थात सीधे तौर पर कहे तो काला गड्ढा। जब कोई तारा तो ब्लैकहोल उच्च गुरतकर्षण वाला एक ऐसा पिंड है जिससे प्रकाश तक बाहर नही निकल पाता।
ब्लैक होल निर्माण की बात करे तो जब किसी तारे का ईंधन (हाइड्रोजन,etc) खत्म हो जाता है तो वह अंत मे वह अपने सिकुड़ता जाता है और जैसे जैसे यह सिकुड़ता है वैसे वैसे यह गुरुत्वाकर्षण प्रभाव और भी बड़ा होता जाता है और फिर यह इतना ताकतवर हो जाता है,कि इससे प्रकाश भी बाहर नही निकल पाता।

आप ब्लैक होल कितना ताकत वर है इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते है कि एक ब्लैक होल के चारो और 20 से भी ज्यादा तारे चक्कर लगाते हुए पाए गए है। वही ऐसा नही है कि हर तारा ब्लैक होल बने ,बल्कि इसके लिए एक लिमिट है,जिसे भारतीय वैज्ञानिक चंद्रशेखर ने बताया था।
उन्ही के नाम पर इसे चन्द्रशेखर लिमिट कहा जाता है ।जिसके अनुसार किसी तारे को ब्लैकहोल बनने के लिए हमारे सूरज से लगभग चार गुना बड़ा होना चाहिए।तो इसका मतलब यह हुआ कि हमारे सूरज का जब ईंधन खत्म होगा तो यह ब्लैक होल नही बनेगा,बल्कि यह व्हाइट ड्वार्फ तारे में तब्दील हो जाएगा।

वही ऐसा भी नही नही है कि किसी तारे का ईंधन धीरे धीरे समाप्त होगा और वो ब्लैकहोल या व्हाइट ड्वार्फ बन जाये, बल्कि इससे पहले तारो में सुपरनोवा जैसी बड़ी घटनाएं भी देखने को मिलती है।

8 टेलीस्कोप ने EHTBlackhole के जो डेटा इकट्ठा किया,वो निम्न आंकड़ो के बराबर है:
5000 साल तक लगातार MP3 के
40000 व्यक्तियों की पूरी जिंदगी की सेल्फी के
और बात अगर माप की करे तो 5 मिलियन गीगाबाइटस के

Updated: April 11, 2019 — 9:51 am

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