ये 08 टॉप छोटे टेक्निकल अविष्कार ने दुनिया के सोच लो बदल दिया

पहिये के आविष्कार के रूप में एक कहानी है कि आदि मानव ने जब लकड़ी के गोल लट्ठे को घूमते देखा तो उसे पहिये का विचार आया । हालांकि घूमते लट्ठे से पहिए तक जाने में थोड़ा समय लगा ही होगा ।लेकिन इतना आदिमानव ने घूमते लट्ठे का इस्तेमाल ही पहिये के रूप में किया होगा इसकी सम्भावना ज्यादा है। हालांकि हम अपने नजरिये से देखे तो आज के मानव के लिए यह बच्चों का खेल है।लेकिन अगर उस समय या अगर पहिया आज ना होता तो आज भी हम उस घूमते लट्ठे को देखे तो एक विचार के रूप में इसके अपने बड़े मायने होंगे।
हालांकि पहिये का अविष्कार भले ही छोटे स्तर पर हुआ हो लेकिन यह बहुत ही बड़ी खोज थी ।परन्तु इसके उलट कुछ ऐसी भी खोज और अविष्कार है जो अपने स्तर पर दुनिया को बदल रहे है।तो आइए कुछ ऐसे ही अविष्कारों के बारे में आज हम जानते है।

1. Oral rehydration salts–

1990 तक हर साल 5 मिलियन बच्चे उल्टी,दस्त जैसी बीमारियों से होने वाले डिहाइड्रेशन से मर रहे थे।परन्तु आज यह आंकड़ा 1.5 से 2 मिलियन तक कम हुआ है और इसका श्रेय जाता है Oral rehydration salts यानी O.R.S को। ORS यानी नमक व चीनी का घोल का घर पर ही बना घोल जिसने डिहाइड्रेशन से विश्व को निकालने में काफी मदद की।
साथ ही यह घरों से निकलकर फार्मा कम्पनियों के लिए भी एक मुख्य प्रोडक्ट बन कर उभरा।जिसमे जिंक को भी एक एडिशनल तत्व के रूप में मिलाया जा सकता है।

2. DC Power Microgrid–

सौर सेल सस्ती, विकेन्द्रीकृत बिजली प्रदान कर सकते हैं।लेकिन अगर आप इसे पारम्परिक उपकरणो में प्लग करते है,तो यहां डीसी को एसी में बदलने के बहुत सारे ओवरहेड शामिल है जो बारी-बारी यह प्रक्रिया दोहराते है।लेकिन ऐसे में एक अच्छी तरह से डिज़ाइन किया गया छोटा डीसी नेटवर्क(DC Power Microgrid)इस ज़रूरत को खत्म करके काफी मात्रा में ऊर्जा बचा सकता है।

3. Better Woodstove–

विकासशील दुनिया के अधिकांश हिस्सों में वनों की कटाई एक बड़ी समस्या है, क्योंकि मानव स्वास्थ्य को नुकसान होता है जो कि वुडस्टोव से निकलने वाले धुएं में मौजूद पार्टिकुलेट पदार्थ में सांस लेने से आता है।लेकिन Berkeley-Darfur stove जैसे बेहतर डिजाइन स्टोव के इस्तेमाल से इस समस्या से काफी हद तक निजाद पायी जा सकती है क्योंकि बर्कले-डर्फ़र स्टोव खाने की तुलनात्मक मात्रा को पकाने के लिए केवल आधे ईंधन का उपयोग करते हैं, और वे आधे हिस्से में भी कण उत्सर्जन में कटौती करते हैं।

4. सस्ते ,साधारण व प्रभावी पानी के फ़िल्टर–

दुनिया मे लाखो लोग ऐसे है जिन्हें सुरक्षित पानी की कमी है। लेकिन अशुद्ध और रोगजनक पानी को छानने के लिए सरल व सस्ते पानी के फिल्टर में राख के साथ संयुक्त रूप से चांदी के नैनो कणों का प्रयोग किया जा रहा है,जिससे हजारों लोगों के जीवन मे सुधार हुआ है।

5. Hippo Roller–

लाखों लोगों को, आमतौर पर महिलाओं को, अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए पर्याप्त पानी पाने के लिए हर दिन चलना पड़ता है और बाल्टियों में इसे घर पहुंचाना होता है।
हिप्पो रोलर एक हैवी ड्यूटी प्लास्टिक बैरल है, जिसे खुरदरी नाली के ऊपर, एक संलग्न हैंडल के माध्यम से लुढ़काया जाता है।

6. Paper microscope–

माइक्रोस्कोप बीमारियों में संक्रामक सूक्ष्म जीवो का पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण और जरूरी उपकरण है ,परन्तु साथ ही यह महंगा और उच्च रखरखाव वाला उपकरण भी है। ऐसे में पेपर माइक्रोस्कोप को इसके बेहतर विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। पेपर माइक्रोस्कोप फोल्ड पेपर होता है जिसमे की लेंस लगे होते है।वही यह हैंडमेड कभी भी बनाया जा सकने वाला यंत्र है,जोकि एक डॉलर की कीमत में ही बन जाता है।

7. आपदा संचार प्रणाली–

सेल फोन गरीब देशों में भी आम हैं, लेकिन जब एक प्राकृतिक आपदा आती है, तो इन उपकरणों पर भरोसे के कारण संचार नेटवर्क कब फेल हो जाये कहा नही जा सकता।चिली में विकसित, SiE एक ऐसी प्रणाली है जो टेक्स्ट को हाई-फ़्रीक्वेंसी ऑडियो टोन में एन्कोड करता है जिसे ब्रॉडकास्ट रेडियो तरंगों पर वितरित किया जा सकता है और किसी भी इंटरनेट इन्फ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता के बिना किसी भी स्मार्टफोन पर प्राप्त किया जा सकता है।इसके लिए एक स्पेशल एप होता है जो इन फ्रेकवेसी को पकड़ता है और फ्रेकवेसी सन्देश को टेक्स्ट में बदल देता है।

8. Portable malaria screener–

मलेरिया से हर रोज औसतन करीब 1200 बच्चों की मौत हो जाती है। जिसके लिए त्वरित निदान और उपचार महत्वपूर्ण है ।लेकिन इसके लिए आमतौर पर रक्त रक्त के नमूनों के लिए एक माइक्रोस्कोप और विश्वसनीय तकनीक अनिवार्य होती है।लेकिन इससे निपटने के लिए दक्षिण कैलिफोर्निया विश्विद्यालय के छात्रों ने एक सरल व पोर्टेबल प्रणाली विकसित की है जो हेमोजेन जोकि मलेरिया परजीवी द्वारा बनाया गया एक उप-उत्पाद है ,के स्तर का तेजी से पता लगाती है जिससे पता लग जाती है कि आखिर बीमारी कितने आगे बढ़ गयी है। जिसके उपरांत इलाज शुरू किया जा सकता है।

Updated: April 18, 2019 — 6:54 pm

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